कुछ पल मेरे अपने

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मैंने हर तीर बचा रखा है,
तू जो सामने आये तुझको दिखलायूं हर घाव हरा रखा है..

मलहम तो बहुत मिल जायेंगे..पर ज़ख्म कहाँ से लायेंगे …
जब सामने तुम आ जाओगे..
ये सोच हर दर्द को सीने से लगा रखा है…
तू जो सामने आये, तुझको दिखलायूं हर घाव हरा रखा है..

कितनी उल्फ़त से ,बड़ी शिद्दत से निभाया हर रिश्ता हमने
सालों तेरे इश्क की उम्मीद में घुटते रहे,मरते ही रहे …
अपने प्यार की मईयत को अब तो हाथों में उठा रखा है …
तू जो सामने आये, तुझको दिखलायूं हर घाव हरा रखा है..

एक मंजिल कहो या कह लो मोड़ उसे,
या फिर कह लो मोहब्बत का तोड़ उसे
सब पार करके देख लिया,हर ख़ूब-सूरत रिश्ते को दूर होते देख लिया ….
इश्क़ की आग ने दिल को अब तो नफ़रत से भरा रखा है …
तू जो सामने आये, तुझको दिखलायूं हर घाव हरा रखा है…

सुरभि

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