गुंचो की माला | Gunchon ki Mala

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गुंचो की माला | Gunchon ki Mala

कुछ पल है मेरे अपने
कुछ हैं पूरे
कुछ है सपने
उन सपनों को
चुन चुन कर
हम
एक एक मोती में ढालेंगे

हर मोती में छिपे दर्द को,
हँस हंस के हम छिपा गए
जिस ग़म से रिश्ता रखते थे,
उन से नाता छुड़ा लिया
जीवन की इस फ़ुलवारी में
प्यार का गुल है खिला लिया

सोचा था
इन गुंचों की माला को
प्यार से तेरे गले में डालेंगे
उन सपनों को
चुन चुन कर
हम
एक एक मोती में ढालेंगे


 

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