घनशाम

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मेरे जीवन के गीतों में  
जो तुम आकर बस जाते
मामूली से गीत वही क्या 
अनमोल नहीं बन जाते 
 
जो तुम गा लो उन गीतों को 
जीवन मेरा सार्थक जो जाये 
बाँसुरी की तानों को सुनकर 
हम तेरी मीरा हो जाएँ 
 
थाम जो लेते तुम 
मेरे जीवन के दुःख को
तो क्या वो दुःख फिर 
मेरे घन शाम नही बन जाते 
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