तुम शरारत से ढलो

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अजी प्यार के व्यापार में
हम नहीं है..छोड़िए 
ज़िंदगी एक फ़लसफ़ा है …
दिल से दिल को जोड़िए

राह से रास्ते बनेंगे
मन से मंजिल की तरफ़
आप भी एक रोज़ तो
दर से दर को मोड़िए ….

रूप से न रंग से है
इश्क़ तेरे संग से है
नाम से मेरे कभी
ये नाम अपना जोड़िये ….

मैं मोहब्बत बनके आऊँ
तुम शरारत से ढलो
दूरियाँ सारी मिटा कर
मन से मन को जोड़िए ।।।
#सुरभि
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