राग चारुकेशी – विवरण

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नमस्कार दोस्तों आज से हम संगीत और राग पर आधारित इंटरव्यू सीरीज़ शुरू करने वाले हैं इसी श्रृंखला में हम नए नए संगीत से जुड़े एक्सपर्ट्स और संगीत गुरुओं से रूबरू करवाएंगे, आज पहले एपिसोड की शुरुआत में आज हम मास्टर शिवम कुमार राजपूत के विचार और प्रदर्शन को लेकर आये हैं तो आज हम बात करेंगे राग चारुकेशी पर

राग चारुकेशी

आरोह -: SA RE GA MA PA dha ni SA
अवरोह -: SA ni dha PA MA GA RE SA

पकड़ :- dha ni SA RE GA RE, GA MA RE SA

ये एक भक्तिमय और भक्ति रस में डूबी हुई कर्ण प्रिय राग है | इसका वादी संवादी SA MA है | ये सम्पूर्ण सम्पूर्ण जाति की राग है आरोह और अवरोह में 7 स्वर लगते हैं, जिसमें ध और नि कोमल लगते हैं |

कब गायें

दिन के द्वितीय प्रहर में गाई और बजायी जाती है |

अनोखापन

ये राग लिख कर नहीं समझाई जा सकती है, शिवम कुमार के अनुसार राग चारुकेशी एक बेहद सुरीली राग है, ये दक्षिण पद्धति की राग है इसमें भैरव, दरबारी, नट, और नट भैरव के अंश दिखाई पड़ते हैं | इस राग के बारे में अधिक जानने के लिए आप हमारे वीडियो को ज़रूर देखें …

 

 

राग चारुकेशी पर आधारित फ़िल्मी गीत

श्याम तेरी बंशी पुकारे राधा नाम
किसी राह में किसी मोड़ पर
बेदर्दी बालमा तुझको मेरा मन
अकेले हैं चले आओ जहां हो
बेखुदी में सनम उठ गए जो
तेरी उम्मीद तेरा इंतज़ार करते है

इस वीडियो में आप शिवम कुमार की गाई हुई ग़ज़ल सुन सकते हैं जो राग चारुकेशी पर आधारित है

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