रेडियो से जुड़ाव – अपनी बात | Apni Baat

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जीवन में एक ही शौक मेरे मन के क़रीब रहा जो मुझे नानी से मिला वह था रेडियो पर पुराने गाने सुनने का शौक, यही शौक मुझे रेडियो से जोड़ कर रखता है,

पुराने गीत, वो दिल को छु लेने वाले बोल, वो संगीत मेरी तन्हाई का साथी है, पुराने गीतों के साये में कुछ पुरानी यादें जो कशिश बन कर मेरे आसपास रहती है

मैंने वर्ष 2000  से जबलपुर रेडियो के साथ अपने सफर की शुरुवात की, यह सफर मुझे दिल्ली के FM GOLD तक ले आया ..

छोटे शहर से एक बड़े शहर तक का
ये सफ़र जहाँ खुशनुमा रहा तो वहीँ दुखों ने मेरा रास्ता भी रोका….

लेकिन हार किसको माननी थी? न मैंने हार मानी है, न मैं हार मानूँगी, बस चल रही हूँ मंजिल की तलाश में .. क्योंकि किसी ने सच कहा है की चल रहे हैं हम तो समझों ज़िंदा है हम

आवाज़ की दुनिया से जुड़कर, अपने श्रोताओ और दोस्तों से बातें करके बहुत अच्छा लगता है और यही महसूस होता है कि

मेरी मंज़िल और मेरा पड़ाव
बहुत नज़दीक है
बहुत सीखा रंजो ग़म से
ये ज़िन्दगी मेरी सखी सरीख है ….

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