समीक्षा – बिमलेश त्रिपाठी द्ववारा

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सुरभि का प्रथम काव्य संकलन मेरे सामने है और मैं सोच रहा हूं कि कविता आखिर क्या है। 

वही जो आपके दिल में बेचैनी, पीड़ा, छटपटाहट या फिर प्यार बनकर उभरती है। 

सुरभि की कविताएं उनके दिल की बेचैनी और छटपटाहट से उपजी हुई हैं। 

इन कविताओं में बड़े कवियों की तरह अछूते बिंब नहीं हैं, लेकिन एक सीधे-सादे कवि के सहज हृदय का कोमलपन और सरलता है। 

इन कविताओं को इसी तरह पढ़े जाने की जरूरत है। 

यह कवयित्री का पहला संग्रह है इसलिए इसमें आपको एक पहलापन भी नजर आएगा – 

लेकिन यह आशा की जानी चाहिए कि भविष्य में लिखते हुए उनका कवित्व एक ऊंचाई पर पहुंचेगा। 

सुरभि की कविताओं में प्यार है, घर है, जुदाई है और दुनिया को देखने की अपनी एक अलग आंख है। 

यह कवयित्री अपनी सहजता और सरलता में ही अपना कवित्व संभव करती है। 

कवयित्री के पहले कविता संग्रह के लिए ढेर सारी बधाइयां और उनके उज्जवल भविष्य के लिए 

शुभकामनाएं… 



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