सुरभित मैं

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एक सूरज
उग रहा,
मेरी भी ज़िन्दगी में..
 
कुछ बादलों से छिपकर,
ओट में सिमटकर..
 
एक नन्ही किरण,
छम से ………
मुझ पर भी आ पड़े जो..
आशा यही है मेरी,
 
रौशन सवेरा होगा
 
मेरी भी ज़िन्दगी में
 
 
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