ख्वाजा ग़रीब नवाज़ के मिशन पर काम करना वक्त की अहम ज़रुरत

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ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ का उर्स-ए-पाक अकीदत से मनाया गया

गौसे आज़म फाउंडेशन ने बांटा कंबल

गोरखपुर। हिंद के बादशाह महान दरवेश हज़रत ख़्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती अलैहिर्रहमा (ख़्वाजा ग़रीब नवाज़) का 813वां उर्स-ए-पाक मंगलवार को शहर में अकीदत के साथ मनाया गया। दरगाह नक्को शाह बाबा धर्मशाला बाजार, चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर, दरगाह हज़रत मुबारक खां शहीद‌ नार्मल, सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफ़रा बाज़ार, मकतब इस्लामियात तुर्कमानपुर व मुस्लिम घरों में कुरआन ख्वानी व फातिहा ख्वानी हुई। दरगाह पर लंगर बांटा गया। कुल शरीफ की रस्म अदा कर मुल्क में अमन, शांति, तरक्की व भाईचारे की दुअा मांगी गई। गौसे आजम फाउंडेशन ने विभिन्न जगहों पर कंबल बांटा। अकीदतमंदों ने उलमा किराम की जुब़ानी ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ की ज़िंदगी के वाकयात, करामात, तकवा व परहेजगारी के बारे में सुना।

मकतब इस्लामियात में कारी मो. अनस रजवी व हाफिज अशरफ रज़ा ने कहा कि ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ ने फ़रमाया है कि कोई भी शख़्स नमाज़ के बगैर अल्लाह का करीबी नहीं बन सकता है। हमें शरीअत पर अमल करते हुए पाबंदी से नमाज़ अदा करनी चाहिए। ख्वाजा गरीब नवाज के मिशन पर काम करना वक्त की अहम जरुरत है। ख्वाजा गरीब नवाज ने तौहीद, रिसालत व मुहब्बत का पैग़ाम पूरी दुनिया में आम किया।

सब्जपोश हाउस मस्जिद में हाफ़िज़ रहमत अली निज़ामी ने कहा कि ख्वाजा ग़रीब नवाज़ अल्लाह के नेक बंदे थे। आपका नाम हसन और लकब मोईनुद्दीन है। आप पैग़ंबरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का हुक्म पाकर तकरीबन 800 साल पहले हिंदुस्तान तशरीफ़ लाए। आपके अदब ओ अख़्लाक से प्रभावित होकर बड़ी तादाद में लोग इस्लाम के दामन से जुड़ गए। आपने सारी ज़िंदगी अल्लाह व रसूल की फरमाबरदारी व शरीअत की पाबंदी में गुजारी।

चिश्तिया मस्जिद में मौलाना महमूद रज़ा कादरी ने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि हम अपने बुजुर्गों की ज़िंदगी को जानें, पढ़ें और उस पर अमल करने की पूरी कोशिश करें। ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ की पूरी ज़िंदगी हमें अंबिया किराम, सहाबा किराम, अहले बैत व औलिया किराम की ताज़ीम और शरीअत पर चलने की शिक्षा देती है।

गौसे आजम फाउंडेशन के जिलाध्यक्ष समीर अली ने कहा कि ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ की ज़िंदगी से हमें इंसानों की खिदमत करने की शिक्षा मिलती है। आज उम्मत की खास तादाद शिक्षा से दूर है लिहाजा ज़रूरत है कि बुजुर्गों के नाम से लोगों को शिक्षा दिलाने के लिए शिक्षा पर ज्यादा से ज्यादा खर्च किया जाए। मार्डन मदरसा, स्कूल, कॉलेज व यूनिवर्सिटी खोली जाए। इस मौके पर मो. अमन, मो. फैज, अली, गजनफर शाह, रियाज अहमद, मो. जैद, अमान अहमद, मो. जैद कादरी, मो. आरिफ, मो. शरिक आदि मौजूद रहे।

  • Syed Farhan Ahmad

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